How to File GSTR-1 Online Return
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Full Details of GSTR3B Online Return
GST कितने प्रकार का होता है?
GST तीन तरह का होता है
1. SGST (State GST)
2. CGST (Central GST)
3. IGST (Integrated
GST)
जब कोई Registered Dealer अपने ही राज्य में (Intra State) किसी भी व्यापारी
को माल बेचता है या किसी Registered Dealer से माल खरीदता है तो इस माल के क्रय
एवं विक्रय पर माल के ऊपर SGST एवं CGST लगाया जाता है |
जैसे – अगर कोई Registered Dealer अपने राज्य में (Intra State) 100 का माल 5%
GST के दर से किसी को भी बेचता है तो तो वह अपना बिल इस तरह बनाएगा-
माल का मूल्य – 100.00
SGST@2.5% 2.5.00
CGST@2.5% 2.5.00
कुल 105.00
नोट- एक ही राज्य में लेन-देन होने पर GST का आधा हिस्सा SGST में और आधा
हिस्सा CGST में बट जाता है |
जब कोई Registered Dealer एक राज्य से दुसरे राज्य में (Inter State) किसी भी
व्यापारी को माल बेचता है या किसी Registered Dealer से माल खरीदता है तो इस माल
के क्रय एवं विक्रय पर माल के ऊपर केवल IGST लगाया जाता है |
जैसे – अगर कोई Registered Dealer एक राज्य से दुसरे राज्य में (Inter State) 100
का माल 5% GST के दर से किसी को भी बेचता है तो तो वह अपना बिल इस तरह बनाएगा-
माल का मूल्य – 100.00
IGST@5% 5.00
कुल 105.00
GST Number कि प्राप्ति कितने दिनों में होती है?
GST Registration का Online जब successfully apply कर दिया जाता
है तब हमें ARN (Application Reference Number) की प्राप्ति होती है जिसकी मदद से
हम GST Portal पर Track रख सकते हैं | अगर GSTN (Goods & Services Tax
Network) कि तरफ से कोई demand न हो तो तीन से चार दिनों के अन्दर हमारे Email और
Mobile Number पर GST का Number जारी कर दिया जाता है |
How to Get GST
Number
GST Number लेने कि योग्यता
के बारे में हम पहले के Article में जान चुके हैं | आज का यह Article GST Registration करने से संबंधित है |
सबसे पहले हमलोग documents
के बारे में बात कर लेते हैं |
Documents required for
Individuals
अगर आपका Proprietorship Firm है तो निम्नलिखित documents, GST
Registration के लिए आवश्यक है |
1. Pan Card
2. Aadhar Card
3. Address Proof
of Business Place
4. Address Proof
of Residence
5. Photo
6. Mobile Number
7. Email ID
HUF (Hindu
Undivided Firm)
- PAN card of HUF
- PAN card and Aadhar card of Karta
- Photograph of the owner
- Address proof of principal place of business**
- Mobile Number
- Email ID
Partnership firm
(including LLP Firm)
- PAN card of all partners (including managing partner and authorized
signatory)
- Copy of partnership deed
- Photograph of all partners and authorized signatories (in JPEG format,
maximum size – 100 KB)
- Address proof of partners (Passport, driving license, Voters identity
card, Aadhar card etc.)
- Aadhar card of authorised signatory
- Proof of appointment of authorized signatory
- In the case of LLP, registration certificate / Board resolution of LLP
- Bank account details*
- Address proof of principal place of business**
Company (Public and
Private) (Indian and foreign)
- PAN card of Company
- Certificate of incorporation given by Ministry of Corporate Affairs
- Memorandum of Association / Articles of Association
- PAN card and Aadhar card of authorized signatory. The authorised
signatory must be an Indian even in case of foreign companies/branch
registration
- PAN card and address proof of all directors of the Company
- Photograph of all directors and authorised signatory Board resolution
appointing authorised signatory / Any other proof of appointment of
authorised signatory
- Bank account details*
- Address proof of principal place of business**
GST का Registration केवल Online के माध्यम से ही हो सकता है | Registration करने के लिए GST का
official site www.gst.gov.in को visit करें |
नीचे दिये गए वीडियो में GST Registration Process को समझाया गया है, एक बार
ज़रूर देंखें |
Composition Scheme under GST
हलाकि यह scheme छोटे व्यापारियों अथवा एकाकी व्यापार (Proprietorship) के लिए है, इसे दो भागो मैं विभाजित किया गया है |
(i) Composition Scheme for Trading Company – जो व्यापारी माल का व्यापार करता है उसे Trading Company के श्रेणी में रखा जाता है | अब यह व्यापारी अगर ये Scheme लेना चाहता है तो इस व्यापारी में दो चीज़ का होना बहुत जरूरी है –
(a) व्यापारी का Turnover पिछले Financial Year में 1.50 करोड़ से जियादा नहीं होना चाहिए, और अगर नया व्यापारी है तो भी इसका Turnover 1.50 करोड़ से जियादा नहीं होना चाहिए |
(b) यह व्यापारी अपने राज्य से दुसरे राज्ये में माल को Supply नहीं कर सकता यानी व्यापारी दुसरे राज्य से माल तो खरीद सकता है लेकिन Inter State Supply नहीं कर सकता |
अगर यह दो बातें व्यापारी में पायी जाती है तो वह यह scheme ले सकता है |
(ii) Composition Scheme for Service Provider Company – जो कंपनी सेवा देने का काम करती है Service Provider Company कहलाती है | यदि इस तरह कि कंपनी का Turnover पिछले Financial Year में 50 लाख से जियादा नहीं है तो वह यह scheme ले सकता है |
Composition Scheme लेने के बाद कंपनी के ऊपर कुछ नियम भी लागू होते हैं जो कि इस प्रकार है-
(a) No ITC Available :- इस तरह के व्यापारी को Input Tax Credit (ITC) का लाभ नहीं मिलता है, यानी जब यह व्यापारी माल या सेवा के क्रय के against में जो GST pay करेगा, इसका input इसे प्राप्त नहीं होगा | अब यह input क्या होता है इसके बाद के Article में बताऊंगा | इसलिए हर तरह के updates के लिए हमारे Blog को subscribe करना न भूलें |
(b) No GST Charge – इस तरह का व्यापारी माल या सेवा का विक्रय करते समय ग्राहक से GST वसूल नहीं कर सकता |
(c) ऐसे व्यापारी के पक्के बिल पर Composition Scheme लिखा होना चाहिए, ताकि दुसरे Dealer को पता चल सके |
Composition Scheme में न तो input है और न ही output, लेकिन फिर भी व्यापारी को अपने पॉकेट से टैक्स देना पड़ेगा-
(d) व्यापारी को प्रत्येक तिमाही (Quarterly) में अपने कुल विक्रय का इस प्रकार से GST का भुगतान करना होगा |
For Trading Company – अपने तिमाही (Quarterly) के कुल विक्रय का 1% (SGST@.50%, CGST@.50%)
For Service Provider Company - अपने तिमाही (Quarterly) के कुल विक्रय का 6% (SGST@3%, CGST@3%)
For Restaurant - अपने तिमाही (Quarterly) के कुल विक्रय का 5% (SGST@2.50%, CGST@2.50%)
इस तरह एक वर्ष में पुरे चार Quarter होते हैं |
(e) व्यापारी को प्रत्येक Quarter में CMP-08 GST Return और वर्ष में एक बार GSTR9A File करना पड़ेगा |
(f) इस scheme के अंतर्गत प्रत्येक बिल का हिसाब Government को नहीं देना होता है |
तो अगर कोई व्यापारी इन नियमों एवं शर्तों को पूरा करता है तो वह Composition Scheme ले सकता है |
GST Number कौन सा लें?
GST Number लेने से पहले आप को अपने व्यापार के मुताबिक GST का Registration करना चाहिए |
GST का Registration दो तरह से किया जा
सकता है |
1. Composition Scheme – हलाकि यह scheme छोटे व्यापारियों के लिए है, इसे लेने से पहले इसके कुछ नियम
कानून को समझना जरूरी है | इसे दो भागो में विभाजित किया गया है -
(i). Composition Scheme for Trading Company – जो व्यापारी माल का व्यापार करता है उसे Trading Company के
श्रेणी में रखा जाता है | अब यह व्यापारी अगर ये Scheme लेना चाहता है तो इस
व्यापारी में दो चीज़ का होना बहुत जरूरी है –
(a) व्यापारी का Turnover पिछले Financial
Year में 1.50 करोड़ से जियादा नहीं होना चाहिए, और
अगर नया व्यापारी है तो भी इसका Turnover 1.50 करोड़ से जियादा नहीं होना चाहिए |
(b) यह व्यापारी अपने राज्य से दुसरे राज्ये में माल को Supply नहीं कर सकता
यानी व्यापारी दुसरे राज्य से माल तो खरीद सकता है लेकिन Inter State Supply नहीं
कर सकता |
अगर यह दो बातें व्यापारी
में पायी जाती है तो वह यह scheme ले सकता है |
(ii) Composition Scheme for Service Provider Company – जो कंपनी सेवा देने का काम करती है Service Provider Company कहलाती है | यदि इस तरह कि कंपनी का Turnover पिछले Financial Year में 50 लाख से जियादा नहीं है तो वह यह scheme ले सकता है |
Composition Scheme लेने के बाद कंपनी के ऊपर कुछ नियम भी लागू होते हैं जो कि
इस प्रकार है-
(a) No ITC Available :- इस तरह के व्यापारी को Input Tax Credit (ITC) का लाभ
नहीं मिलता है, यानी जब यह व्यापारी माल या सेवा के क्रय के against में जो GST
pay करेगा, इसका input इसे प्राप्त नहीं होगा | अब यह input क्या होता है इसके बाद
के Article में बताऊंगा | इसलिए हर तरह के updates के लिए हमारे Blog को subscribe
करना न भूलें |
(b) No GST Charge – इस तरह का व्यापारी माल या सेवा का विक्रय करते समय ग्राहक
से GST वसूल नहीं कर सकता |
(c) ऐसे व्यापारी के पक्के बिल पर Composition
Scheme लिखा होना चाहिए, ताकि दुसरे Dealer को पता चल
सके |
Composition Scheme में न तो input है और न ही output, लेकिन फिर भी व्यापारी
को अपने पॉकेट से टैक्स देना पड़ेगा-
(d) व्यापारी को प्रत्येक तिमाही (Quarterly) में अपने कुल विक्रय का इस प्रकार
से GST का भुगतान करना होगा |
For Trading Company – अपने तिमाही (Quarterly) के कुल विक्रय का 1% (SGST@.50%, CGST@.50%)
For Service Provider
Company - अपने तिमाही (Quarterly) के कुल विक्रय का 6% (SGST@3%, CGST@3%)
For Restaurant - अपने तिमाही (Quarterly) के कुल विक्रय का 5% (SGST@2.50%, CGST@2.50%)
इस तरह एक वर्ष में पुरे
चार Quarter होते हैं |
(e) व्यापारी को प्रत्येक
Quarter में CMP-08 GST Return और वर्ष में एक बार GSTR9A File करना पड़ेगा |
(f) इस scheme के अंतर्गत
प्रत्येक बिल का हिसाब Government को नहीं देना होता है |
तो अगर कोई व्यापारी इन
नियमों एवं शर्तों को पूरा करता है तो वह Composition Scheme ले सकता है |
2. Normal Scheme (Regular) - Composition Scheme के इलावा व्यापारी Normal Scheme ले सकता है | वैसे भी हम सभी जानते ही हैं
के Composition Scheme छोटे व्यापरियों अथवा एकाकी व्यापार (Individual) के लिए होता है | दुसरे शब्दों में
एकाकी व्यापार के इलावा सभी प्रकार कि कंपनी को Normal Scheme ही लेना पड़ता है |
Normal Scheme के अंतर्गत
निम्नलिखित नियमों का पालन करना पड़ता है |
b) इस scheme के अंतर्गत
व्यापारी Intra-State एवं Inter-State सभी जगह माल को बेच सकता है
c) इस scheme के अंतर्गत
व्यापारी माल या सेवा के विक्रय करने पर ग्राहक से GST वसूल कर सकता है | जिसे
Output GST कहा जाता है |
d) व्यापारी को अपने Output
GST मैसे Input GST को घटा कर बाकी GST को pay करना होता है | Output – Input = GST Payable
e) इस scheme के अंतर्गत
व्यापारी को हर एक बिल का हिसाब Government को देना होता है |
f) व्यापारी को GSTR1, GSTR3B, GSTR2 और GSTR9 Return File करना होता है |
हर एक Return के बारे में
विस्तार से आप सभी को एक Seprate Article अगले Post में पड़ने को मिलेगी | इसलिए
हमारे Blog को Share & Subscribe करना न भूलें |
If you are an accountant you must watch this video
आप इस वीडियो मैं जानेंगे की अगर Tally से GST का कोई भी रिटर्न export नहीं हो रहा है तो इसका निदान इस वीडियो मैं है
GST Number लेने कि योग्यता (Limit) क्या है?
GST के नियमानुसार GST का
Number लेने के लिए अपने Turnover से पहले आपको अपने राज्य को देखना होगा कि आप
किस राज्य में रह रहे हो अर्थात अपना व्यापार करना चाहते हैं या कर रहे हैं |
पुरे राज्यों को दो भागों
में बांटा गया है –
1. Normal Category- अगर किसी व्यापारी का Turnover फिछले वित्तीय वर्ष में 40 लाख से अधिक है तो ऐसे
व्यापारी को GST Number लेना अनिवार्य हो जाता है (1 April 2019 से लागू), इसके अंतर्गत कई सारे
राज्ये आते हैं | जैसे-Chhattisgarh, Jharkhand, Delhi, Bihar, Maharashtra,
Andhra Pradesh, Gujrat, Haryana, Goa, Punjab, Uttar Pradesh, J&K, Assam,
Himachal Pradesh, Karnataka, Madhya Pradesh, Odisha, Rajasthan, Tamil Nadu,
West Bengal.
2. Special Category- अगर किसी व्यापारी का Turnover फिछले वित्तीय वर्ष में 20 लाख से अधिक है तो
ऐसे व्यापारी को GST Number लेना अनिवार्य हो जाता है (1 April 2019 से लागू), इसके अंतर्गत कई सारे राज्ये आते हैं | जैसे :- Puducherry,
Meghalaya, Mizoram, Tripura, Manipur, Sikkim, Nagaland, Arunachal Pradesh,
Uttarakhand
यह तो बात हो गई Turnover
Limit की, परन्तु Practical way में Turnover Limit की कोई अहमियत नहीं है वह
इसलिए कि अगर आप व्यापरी हैं तो बिना GST Number के आप दुसरे राज्य से माल नहीं
खरीद पाते हैं क्योंके Transporter बिना GST Number वाले को माल की Delivery नहीं
करते हैं | इसलिए याद रखें व्यापार करना है तो GST Number लेना है |
Turnover क्या है?
Turnover का मतलब व्यापार में होने वाले विक्रय से होता
है | व्यापार में होने वाले सभी तरह का Sale व्यापार का Aggregate Turnover कहलाता है |
GST (Goods and Services
Tax)
अगर आप Goods and Services
Tax शब्द पर गौर करें तो आप देखेंगे कि इसमें तीन शब्द मिला हुआ है |
1. Goods (माल)
2. Services (सेवाएं)
3. Tax (कर)
जैसा के हम सभी जानते हैं
कि व्यापार के छेत्र में मोटे तौर पर तीन तरह की कंपनियां काम करती हैं
1. Manufacturing Company - ऐसी कंपनी जो कि माल का उत्पादन करती है तथा तैयार माल को अपने व्यापरियों को
बेचती है तो ऐसी कंपनी को Manufacturing Company के श्रेणी में रखा जाता है |
2 .Trading Company – ऐसी कंपनी जो केवल माल (यानी व्यापारी जिस वस्तु का
व्यापार करता है वही उसका माल कहलाता है) का व्यापार करती है यानी बनना-बनाया माल
खरीदती है और Profit लेकर बेच देती है तो ऐसी कंपनी को Trading Company के श्रेणी में रखा जाता है |
3. Service Provider – ऐसी कंपनी जो केवल सेवा देने का काम करती है तो Service Provider कंपनी कहलाती है | जैसे – Telecom Services Company
जब GST भारत में लागु नहीं
हुआ था तो उस समय कंपनी के nature और माल के मुताबिक अलग-अलग Tax को apply
किया जाता था
जैसे- माल के ऊपर Vat
(Value Added Tax) and CST (Central Sales Tax)
माल के उतपादन पर Excise
Duty
Service पर Service Tax
Entertainment पर Entertainment
Tax
ऊपर दिये गए विवरण से आप को
पता लग गया होगा कि उस समय अलग-अलग Tax लगा करता था अब इस सारे Tax को एक ही Tax
यानी GST में Merge कर दिया गया है |
अब किसी भी तरह का व्यापार हो या सेवा सभी पर
एक तरह का ही Tax लगेगा जिसे अब हम Goods and Services Tax जिसे हिंदी मैं वस्तु एवं सेवा कर कहते हैं | इसलिए
इसे ‘One Nation One Tax’ भी कहा जाता है |
आप को यह पता होना चाहिए कि
जिस तरह VAT का concept, Europe से आया था ठीक उसी तरह GST का Concept भी Europe
देशों से ही आया है |
GST भारत में कब लागू हुआ?
GST पुरे भारत में 1 July 2017 को लागु किया गया था
|
Full GST Accounting in Tally ERP.9
अगर आप GST का पूरा काम सीखना चाहते
हैं तो नीचे दिए गए वीडियो को जरुर देखें इसमें GST से संबंधित सारी Entry को Tally में Cover किया गया
है और साथ ही साथ इसमें जितने तरह Returns होते है उसे भी Practical Way में बताया
गया है | जैसे – GSTR-1, GSTR3B and
GSTR2


